इस श्लोक में भगवान कृष्ण कहते हैं कि सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख — ये सब इन्द्रियों के संपर्क से पैदा होते हैं। ये आते हैं और चले जाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मौसम बदलते हैं। सर्दी के बाद गर्मी आती है, बारिश के बाद धूप। कोई भी मौसम हमेशा नहीं रहता।
जब छोटे बच्चे को ठंड लगती है तो वह रोता है, लेकिन बड़ा आदमी जानता है कि ठंड कुछ देर की है, गुज़र जाएगी। वैसे ही जीवन के दुःख भी कुछ समय के हैं। धीरज रखने वाला इंसान इन्हें सहकर आगे बढ़ जाता है।
यहाँ 'तितिक्षा' शब्द आया है जिसका अर्थ है सहनशीलता। इस श्लोक में कहा गया है कि बुद्धिमान व्यक्ति सुख में फूलता नहीं और दुःख में टूटता नहीं — वह दोनों को समान भाव से सहता है।