कृष्ण एक बहुत सुंदर उदाहरण देते हैं — जैसे एक ही शरीर में बचपन आता है, फिर जवानी आती है, फिर बुढ़ापा — इसी तरह मृत्यु के बाद आत्मा को नया शरीर मिलता है। जो समझदार है, वह इसमें घबराता नहीं।
सोचिए — एक बच्चा जब बड़ा होता है तो क्या वह 'मर' जाता है? नहीं, वही आत्मा है, बस शरीर बदल गया। वैसे ही मृत्यु में भी शरीर बदलता है, आत्मा नहीं।
यह श्लोक हमें सिखाता है कि बदलाव प्रकृति का नियम है। जो धीर है — अर्थात जिसने इस सत्य को समझ लिया है — वह शोक नहीं करता।