भगवान और स्पष्ट करते हैं — हे कौन्तेय, तुम अपने स्वभाव से उत्पन्न कर्म से बँधे हो। जो मोह से तुम नहीं करना चाहते — वह भी विवश होकर करोगे।
यह एक बड़ा सत्य है। हम सोचते हैं कि हम स्वतंत्र हैं — पर हमारा स्वभाव, हमारे संस्कार, हमारी प्रकृति — ये सब मिलकर हमें एक दिशा में ले जाते हैं।