तामस सुख वह है जो पहले भी आत्मा को मोहित करे और अंत में भी। यह नींद, आलस और प्रमाद से उत्पन्न होता है। इसमें न आरंभ में कोई उन्नति है, न अंत में।
बहुत अधिक सोना, बेकार बैठे रहना, जीवन के प्रति उदासीन रहना — इससे जो 'आराम' मिलता है, वह तामस सुख है। यह आनंद नहीं, जड़ता है।