सात्त्विक बुद्धि वह है जो जानती है — कब प्रवृत्त होना है, कब हटना है; क्या करना उचित है, क्या नहीं; कहाँ भय है, कहाँ निडरता; क्या बंधन है, क्या मुक्ति।
यह बुद्धि जीवन की हर परिस्थिति में सही निर्णय लेती है। वह न भटकती है, न घबराती है। यही सात्त्विक बुद्धि का वरदान है।