भगवान कहते हैं — हे धनंजय, अब बुद्धि और धृति के भेद को भी गुणों के अनुसार तीन-तीन प्रकार में सुनो। यह पूरी तरह और अलग-अलग बताया जाएगा।
गीता का यह भाग बहुत व्यवस्थित है। ज्ञान, कर्म, कर्ता — हो गए। अब बुद्धि और धृति। और अंत में सुख। यह पूरा गुण-विवेचन का एक सुंदर ढाँचा है।