राजस कर्म वह है जो कामना से किया जाए — 'मुझे यह चाहिए, मुझे वह मिलना चाहिए' — या जो अहंकार के साथ किया जाए — 'मैं यह कर रहा हूँ।' ऐसे कर्म में बहुत प्रयास और तनाव होता है।
राजस कर्म बुरा नहीं — पर यह बांधता है। जब हम किसी काम में 'मेरा' और 'मुझे' बहुत अधिक हो जाता है, तो वह कर्म बोझिल हो जाता है।