सात्त्विक त्यागी कैसा होता है? भगवान कहते हैं — वह न तो कठिन कर्म से डरता है, न आसान-सुखद कर्म से चिपकता है। वह सत्त्वगुण से भरा, बुद्धिमान और संशय-रहित होता है।
यह एक शांत, स्थिर मनुष्य का चित्र है। उसे न ऊँचाई का अभिमान होता है, न नीचाई का दुःख। हर परिस्थिति में वह एक जैसा रहता है — यही सात्त्विक त्यागी का लक्षण है।