अर्जुन के प्रश्न का उत्तर देते हुए भगवान कृष्ण कहते हैं कि प्रत्येक प्राणी की श्रद्धा तीन प्रकार की होती है — सात्त्विक, राजसिक और तामसिक। यह श्रद्धा उसके स्वभाव से उत्पन्न होती है, यानी जिस गुण का प्रभाव जिस व्यक्ति पर अधिक है, उसकी श्रद्धा भी वैसी ही होगी।
जैसे एक ही बगीचे में अलग-अलग पौधे अलग-अलग फूल देते हैं, वैसे ही अलग-अलग स्वभाव के लोगों की श्रद्धा भी भिन्न होती है। कोई शांति और ज्ञान की ओर आकर्षित होता है, कोई दिखावे और शक्ति की ओर, और कोई अंधविश्वास की ओर।
भगवान कृष्ण अर्जुन को कहते हैं — सुनो, मैं तुम्हें इन तीनों प्रकार की श्रद्धा के बारे में विस्तार से बताता हूँ। यह पूरे अध्याय की भूमिका है।