अब भगवान बताते हैं कि आसुरी लोग इस संसार को कैसे देखते हैं। वे कहते हैं — यह जगत असत्य है, इसका कोई नैतिक आधार नहीं है, कोई ईश्वर नहीं है जिसने इसे बनाया।
आसुरी विचारधारा मानती है कि सृष्टि बिना किसी उद्देश्य के, बिना किसी क्रम के बस ऐसे ही बन गई। और अगर कोई कारण है भी तो वह केवल काम (वासना) है — स्त्री-पुरुष के संयोग से सब कुछ बना, बस इतनी सी बात है।
यह दृष्टिकोण बहुत खतरनाक है — क्योंकि जब कोई मानता है कि न ईश्वर है, न कोई नैतिक व्यवस्था है, तो वह कुछ भी करने को तैयार हो जाता है। यही आसुरी सोच की जड़ है।