अब श्रीकृष्ण बताते हैं — कौन से लोग उस परम पद को पाते हैं? पाँच गुण गिनाए गए हैं। पहला — मान (प्रतिष्ठा की चाह) और मोह (भ्रम) से मुक्ति। दूसरा — संगति के दोष जीत लेना यानी बुरी संगत का असर न पड़ना।
तीसरा — अध्यात्म में नित्य लगे रहना। चौथा — कामनाओं का विरत होना। पाँचवाँ — सुख-दुख के द्वंद्वों से मुक्ति। जैसे बरसात में भी जो किसान अपने खेत पर ध्यान टिकाए रखे, उसे मौसम परेशान नहीं करता।
यह गुण एक दिन में नहीं आते। लेकिन श्रीकृष्ण यहाँ यह नहीं कह रहे कि तुम ऐसे बनो — वे बता रहे हैं कि जो ऐसे होते हैं, वे उस पद को पाते हैं।