भगवान कहते हैं — हे भरतवंशी, तमोगुण को अज्ञान से उत्पन्न जानो। यह सब प्राणियों को मोह में डालता है। यह प्रमाद (लापरवाही), आलस्य और निद्रा (अत्यधिक नींद) से जीवात्मा को बाँधता है।
इसे ऐसे समझो — जब कोई व्यक्ति "कल करेंगे, अभी नहीं" सोचता रहता है, जब मन में उमंग नहीं उठती, जब बिना कारण भारीपन लगता है — तो यह तमोगुण का प्रभाव है।
तमोगुण से ग्रस्त व्यक्ति को न सही-गलत की समझ रहती है (अज्ञान), न कुछ करने का मन होता है (आलस्य), और न ही सावधानी रहती है (प्रमाद)।