यह अध्याय की सबसे सुंदर उपमा है। जैसे एक सूर्य इस पूरे जगत को प्रकाशित करता है — वैसे ही एक क्षेत्री — आत्मा — इस पूरे शरीर-रूपी क्षेत्र को प्रकाशित करती है।
सूर्य दूर होते हुए भी सबको रोशन करता है। वह खुद किसी चीज़ से रंगता नहीं। उसी तरह आत्मा सब इन्द्रियों को, मन को, बुद्धि को जगाती है — पर खुद अलिप्त रहती है।