जब आत्मा प्रकृति में रहती है और उसके गुणों से चिपक जाती है — तब वह उन्हें भोगती है। और यही चिपकना — यही गुणों में आसक्ति — अच्छी और बुरी योनियों में जन्म का कारण बनती है।
सरल भाषा में — जैसे आम हो तो आम की टहनी पर, इमली हो तो इमली की टहनी पर। जो गुण पकड़े, वैसा जन्म। यह जन्म-बंधन का मूल कारण है।