तेरहवाँ अध्याय अर्जुन के एक सरल प्रश्न से शुरू होता है। वे कहते हैं — हे केशव, मैं जानना चाहता हूँ कि प्रकृति क्या है और पुरुष क्या है। यह शरीर जिसे 'क्षेत्र' कहते हैं, वह क्या है? और इसे जानने वाला 'क्षेत्रज्ञ' कौन है? ज्ञान क्या है और जानने योग्य क्या है?
ये सब बड़े गहरे प्रश्न हैं। लेकिन अर्जुन ने इन्हें सीधे और विनम्रता से पूछा। जैसे एक बच्चा अपनी दादी से पूछे — 'दादी, मैं कौन हूँ?' — यह प्रश्न छोटा लगता है, पर इसका उत्तर बहुत गहरा है।
भगवान कृष्ण इसी प्रश्न का उत्तर पूरे तेरहवें अध्याय में देते हैं। यह श्लोक पूरे अध्याय का द्वार है।