अर्जुन के मन में एक सच्चा सवाल उठा। उन्होंने कृष्ण से पूछा — एक तरफ वे भक्त हैं जो आपके सगुण रूप की उपासना करते हैं, आपके नाम-रूप को ध्यान में रखते हैं। दूसरी तरफ वे साधक हैं जो निराकार, अव्यक्त ब्रह्म की उपासना करते हैं। दोनों में से कौन योग को बेहतर जानता है?
यह सवाल बहुत ज़रूरी था। जैसे एक बच्चा पूछे — दादा, घर पहुँचने के लिए कौन-सा रास्ता ठीक है? अर्जुन भी भक्ति के दो रास्तों के बीच खड़े थे और कृष्ण से मार्गदर्शन माँग रहे थे।
यही प्रश्न पूरे बारहवें अध्याय का आधार है। कृष्ण का उत्तर आगे के सभी श्लोकों में आता है।