कृष्ण कहते हैं — तुम इन साधारण आँखों से मुझे नहीं देख सकते। इसलिए मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि दे रहा हूँ — उससे मेरा ऐश्वर्यमय योग देखो। जैसे अँधेरे में दीपक जलाए बिना चित्र दिखता नहीं, वैसे ही दिव्य दृष्टि के बिना विश्वरूप नहीं दिखता।
यह दिव्य दृष्टि कृष्ण की कृपा से मिलती है। यही कारण है कि संजय को भी व्यास जी ने दिव्य दृष्टि दी थी — ताकि वे युद्धभूमि का दृश्य धृतराष्ट्र को सुना सकें।