कृष्ण कहते हैं — हे गुडाकेश, आज मेरे इस एक शरीर में समस्त जगत — चर और अचर सब — एक साथ देखो। और जो कुछ और देखना चाहो, वह भी यहीं है। जैसे आकाश में असंख्य तारे हों पर आकाश एक ही हो।
'गुडाकेश' का अर्थ है — जिसने निद्रा को जीत लिया। यह संबोधन अर्जुन की जागरूकता और धनुर्विद्या में महारत का सूचक है।