📿 श्लोक संग्रह

पश्यादित्यान्वसून्रुद्रान्

गीता 11.6 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 11 — विश्वरूपदर्शनयोग
पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा ।
बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥
आदित्यान् वसून् रुद्रान्
आदित्य, वसु, रुद्र
अश्विनौ मरुतः
अश्विनी कुमार और मरुद्गण
अदृष्टपूर्वाणि
पहले कभी न देखे हुए
आश्चर्याणि
आश्चर्यजनक दृश्य

कृष्ण कहते हैं — हे भारत, मेरे इस रूप में आदित्य, वसु, रुद्र, अश्विनी कुमार और मरुद्गण — सभी देव दिखते हैं। इसके अलावा ऐसे अनेक अद्भुत दृश्य हैं जो तुमने पहले कभी नहीं देखे।

आदित्य सूर्य के बारह रूप हैं, वसु आठ हैं, रुद्र ग्यारह हैं — ये सब देव-गण एक ही विराट रूप में समाए हुए हैं।

यह श्लोक विश्वरूप की विशालता का संकेत देता है। सारे देवता और उनके गण एक ही परमात्मा-रूप के अंश हैं।

अगले श्लोक (11.7) में कृष्ण कहेंगे — समस्त चराचर जगत इसी एक शरीर में देखो।

अध्याय 11 · 6 / 55
अध्याय 11 · 6 / 55 अगला →