अर्जुन कहते हैं — आप ही वायु हैं, यम हैं, अग्नि हैं, वरुण हैं, चंद्रमा हैं, प्रजापति हैं और सबके परदादा भी आप ही हैं। आपको हजार बार नमस्कार, फिर से और फिर से नमस्कार।
यह श्लोक अर्जुन की भक्ति-भावना की पराकाष्ठा है। 'सहस्रकृत्वः नमः' — हजार बार प्रणाम — शब्द कम पड़ रहे हैं, इसलिए वे बार-बार नमस्कार करते हैं।