कृष्ण कहते हैं — इसलिए हे सव्यसाची अर्जुन, उठो। यश कमाओ। शत्रुओं को जीतकर समृद्ध राज्य भोगो। ये सब पहले ही मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं — तुम केवल निमित्त बनो।
यह गीता का सबसे व्यावहारिक वचन है। कृष्ण कहते हैं — परिणाम मेरे हाथ में है, कर्म तुम्हारा है। निमित्त बनना — यही कर्मयोग का सार है।