📚 पंचतंत्र

बन्दर और मगरमच्छ

6+ ~4 मिनट विष्णु शर्मा के पंचतंत्र से
📖 विष्णु शर्मा — पंचतंत्र

बहुत समय पहले की बात है। एक नदी के किनारे जामुन का एक बड़ा पेड़ था। उस पेड़ पर एक बन्दर रहता था।

नदी में एक मगरमच्छ भी रहता था। बन्दर और मगरमच्छ में धीरे-धीरे दोस्ती हो गई। बन्दर रोज़ उसे मीठे जामुन खिलाता था।

एक दिन मगरमच्छ कुछ जामुन अपनी पत्नी के लिए भी ले गया। पत्नी ने जामुन खाए और मन में सोचा — जो इतने मीठे जामुन खाता है, उसका कलेजा कितना मीठा होगा!

उसने मगरमच्छ से कहा, 'मुझे उस बन्दर का कलेजा चाहिए। बिना उसके मैं नहीं जियूँगी।' मगरमच्छ बड़ी मुश्किल में पड़ गया।

अगले दिन मगरमच्छ बन्दर के पास गया। बोला, 'मेरी पत्नी तुमसे मिलना चाहती है। मेरी पीठ पर बैठो, मैं तुम्हें उस पार ले चलता हूँ।' बन्दर खुशी-खुशी बैठ गया।

नदी के बीच में पहुँचकर मगरमच्छ ने सच बता दिया। बन्दर घबराया नहीं। उसने शांति से कहा, 'अरे, तुमने पहले क्यों नहीं बताया? मेरा कलेजा तो मैं पेड़ पर ही छोड़ आया हूँ!'

मगरमच्छ उसे वापस किनारे ले आया। बन्दर फुर्ती से पेड़ पर चढ़ गया और बोला, 'भला कोई अपना कलेजा साथ लेकर चलता है? तुमने मुझे धोखा देने की सोची, पर बुद्धि ने मुझे बचा लिया।' फिर उसने मगरमच्छ से दोस्ती तोड़ ली।

पंचतंत्र · 2 / 15
💡 इस कहानी की सीख
संकट में घबराहट नहीं, बुद्धि काम आती है।
यह कथा बताती है कि मुसीबत में शांत रहने वाला ही रास्ता निकाल पाता है। बन्दर के पास ताकत नहीं थी, पर उसने दिमाग से काम लिया। विष्णु शर्मा की इस कथा में बुद्धि की जीत को सरल ढंग से दिखाया गया है।
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