आठवें अनुवाक में रुद्र के दिव्य स्वर्णमय स्वरूप, भूमि-अधिपत्य, सेनानायक रूप और ईशान नाम से स्तुति है। रुद्र सर्वशक्तिमान ईश्वर हैं।
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
मन्त्र 1
नमो हिरण्यबाहवे हिरण्यवर्णाय हिरण्यरूपाय ।
हिरण्यबाहवे
स्वर्ण भुजाओं वाले को
हिरण्यवर्णाय
स्वर्ण वर्ण वाले को
हिरण्यरूपाय
स्वर्णमय रूप वाले को
स्वर्ण भुजाओं वाले, स्वर्ण वर्ण वाले और स्वर्णमय रूप वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 2
नम ऊर्वराय चाधिपत्याय च ।
ऊर्वराय
उपजाऊ भूमि रूप को
अधिपत्याय
अधिपति (शासक) को
उपजाऊ भूमि के रूप में और अधिपति रूप में विद्यमान रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 3
नम उच्चैर्घोषाय चाक्रन्दयते च ।
उच्चैर्घोषाय
ऊँचे स्वर वाले को
आक्रन्दयते
गर्जना करने वाले को
ऊँचे स्वर से गर्जना करने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 4
नमः पत्तिनते च कृत्स्नवीताय च ।
पत्तिनते
पैदल सेना के नायक को
कृत्स्नवीताय
सम्पूर्ण कवचधारी को
पैदल सेना के नायक और सम्पूर्ण कवच धारण करने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 5
नमो धावते च प्रधावते च ।
धावते
दौड़ने वाले को
प्रधावते
तेज़ी से दौड़ने वाले को
दौड़ने वाले और तीव्र गति से दौड़ने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 6
नम ईशानाय च ।
ईशानाय
सबके ईश्वर (ईशान) को
समस्त सृष्टि के ईश्वर, ईशान रुद्र को नमस्कार है।
संदर्भ
श्री रुद्रम् · 8 / 22