📿 हनुमान चालीसा

चौपाई 17–24

हनुमान चालीसा · 3 / 5
📖 तुलसीदास (16वीं शताब्दी) द्वारा रचित
चौपाई 17
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना ।
लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥
तुम्हरो मंत्र
आपकी सलाह
बिभीषन
विभीषण ने
माना
मानी
लंकेश्वर भए
लंका के राजा बने
सब जग जाना
सारा संसार जानता है
आपकी सलाह विभीषण ने मानी और वे लंका के राजा बने — यह बात सारा संसार जानता है।
चौपाई 18
जुग सहस्र जोजन पर भानू ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
जुग सहस्र जोजन
युग (12,000) × सहस्र (1,000) योजन दूर
भानू
सूर्य
लील्यो
निगल लिया
ताहि
उसे
मधुर फल
मीठा फल
जानू
जानकर, समझकर
जो सूर्य युगों-सहस्र योजन दूर है, उसे आपने बचपन में मीठा फल समझकर निगल लिया था।
चौपाई 19
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥
प्रभु मुद्रिका
प्रभु (श्री राम) की अँगूठी
मेलि
रखकर
मुख माहीं
मुँह में
जलधि
समुद्र
लाँघि गये
लाँघ गए
अचरज नाहीं
कोई आश्चर्य नहीं
प्रभु श्री राम की अँगूठी मुँह में रखकर आपने समुद्र लाँघ लिया — आपके लिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं।
चौपाई 20
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥
दुर्गम काज
कठिन कार्य
जगत के जेते
संसार में जितने भी हैं
सुगम
सरल हो जाते हैं
अनुग्रह
कृपा से
तुम्हरे तेते
आपकी कृपा से वे सब
संसार में जितने भी कठिन कार्य हैं, वे सब आपकी कृपा से सरल हो जाते हैं।
चौपाई 21
राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥
राम दुआरे
श्री राम के द्वार पर
तुम रखवारे
आप रखवाले हैं
होत न
कोई नहीं कर सकता
आज्ञा बिनु
आपकी आज्ञा के बिना
पैसारे
प्रवेश
श्री राम के द्वार पर आप रखवाले हैं। आपकी आज्ञा के बिना कोई वहाँ प्रवेश नहीं कर सकता।
चौपाई 22
सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
तुम रक्षक काहू को डर ना ॥
सब सुख
सब प्रकार के सुख
लहै
प्राप्त होते हैं
तुम्हारी सरना
आपकी शरण में आने पर
तुम रक्षक
आप रक्षक हैं तो
काहू को डर ना
किसी का भय नहीं
आपकी शरण में आने पर सब सुख प्राप्त होते हैं। जब आप रक्षक हैं तो फिर किसी का कोई भय नहीं।
चौपाई 23
आपन तेज सम्हारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥
आपन तेज
अपने तेज को
सम्हारो
सँभालने वाले
आपै
आप ही हैं
तीनों लोक
तीनों लोक
हाँक तें
आपकी गर्जना से
काँपै
काँपते हैं
अपने तेज को आप ही सँभाल सकते हैं। आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप उठते हैं।
चौपाई 24
भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥
भूत पिसाच
भूत-प्रेत
निकट नहिं आवै
पास नहीं आते
महाबीर
महावीर (हनुमान) का
जब नाम सुनावै
जब नाम सुनाया जाए
महावीर हनुमान का नाम सुनते ही भूत-प्रेत पास नहीं आते।

चौपाई 17–24 में विभीषण प्रसंग, बाल हनुमान द्वारा सूर्य निगलना, समुद्र लाँघना, राम-द्वार की रक्षा और हनुमान जी के अपार तेज का वर्णन है।

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