चौपाई 25–32 में हनुमान जी की कृपा से रोग-पीड़ा-संकट का निवारण, उनका चारों युगों में व्याप्त प्रताप, साधु-रक्षा, और माता जानकी द्वारा दिए गए वरदान का वर्णन है।
📖 तुलसीदास (16वीं शताब्दी) द्वारा रचित
चौपाई 25
नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥
नासै
नष्ट होते हैं
रोग
रोग
हरै
दूर होती है
सब पीरा
सब पीड़ा
जपत
जपने से
निरंतर
लगातार
हनुमत बीरा
वीर हनुमान का नाम
तुलसीदास कहते हैं कि वीर हनुमान का नाम स्मरण करने वालों की सब पीड़ा दूर होती है — यह चालीसा का अपना कथन है।
चौपाई 26
संकट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥
संकट तें
संकटों से
हनुमान छुड़ावै
हनुमान जी छुड़ाते हैं
मन क्रम बचन
मन, कर्म और वचन से
ध्यान जो लावै
जो ध्यान लगाता है
जो मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, उसे हनुमान जी सब संकटों से छुड़ाते हैं।
चौपाई 27
सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥
सब पर
सबसे ऊपर
राम
श्री राम
तपस्वी राजा
तपस्वी राजा हैं
तिन के काज
उनके कार्यों को
सकल
सभी
तुम साजा
आपने सँवारा
सबसे ऊपर तपस्वी राजा श्री राम हैं और उनके सब कार्य आपने सँवारे हैं।
चौपाई 28
और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोइ अमित जीवन फल पावै ॥
और मनोरथ
कोई भी मनोकामना
जो कोई लावै
जो कोई लेकर आए
सोइ
वही
अमित
अपार
जीवन फल
जीवन का फल
पावै
पाता है
जो कोई भी अपनी मनोकामना लेकर आपके पास आता है, वह अपार जीवन-फल पाता है।
चौपाई 29
चारों जुग परताप तुम्हारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
चारों जुग
चारों युगों में
परताप
प्रताप
तुम्हारा
आपका
परसिद्ध
प्रसिद्ध है
जगत उजियारा
संसार में प्रकाश फैलाने वाला
चारों युगों में आपका प्रताप प्रसिद्ध है और संसार में प्रकाश फैलाने वाला है।
चौपाई 30
साधु-संत के तुम रखवारे ।
असुर निकंदन राम दुलारे ॥
साधु-संत के
साधुओं और संतों के
तुम रखवारे
आप रक्षक हैं
असुर निकंदन
राक्षसों का नाश करने वाले
राम दुलारे
श्री राम के प्यारे
आप साधुओं-संतों के रक्षक हैं, राक्षसों का नाश करने वाले हैं और श्री राम के अत्यंत प्रिय हैं।
चौपाई 31
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥
अष्ट सिद्धि
आठ सिद्धियाँ
नौ निधि
नौ निधियाँ
के दाता
देने वाले
अस बर
ऐसा वरदान
दीन
दिया
जानकी माता
माता जानकी (सीता) ने
आप आठ सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं — ऐसा वरदान माता जानकी ने आपको दिया है।
चौपाई 32
राम रसायन तुम्हरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥
राम रसायन
राम-भक्ति का रसायन (अमृत)
तुम्हरे पासा
आपके पास है
सदा रहो
सदा रहें
रघुपति के दासा
श्री राम के सेवक
राम-भक्ति का अमृत रसायन आपके पास है। आप सदा श्री राम के सेवक बने रहें।
संदर्भ
हनुमान चालीसा · 4 / 5