📿 हनुमान चालीसा

चौपाई 9–16

हनुमान चालीसा · 2 / 5
📖 तुलसीदास (16वीं शताब्दी) द्वारा रचित
चौपाई 9
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥
सूक्ष्म रूप
अत्यंत छोटा रूप
धरि
धारण करके
सियहिं
सीता जी को
दिखावा
दर्शन दिए
बिकट रूप
विकराल रूप
लंक जरावा
लंका जला दी
आपने अत्यंत छोटा रूप धारण करके सीता जी को दर्शन दिए और विकराल रूप धारण करके लंका को जला दिया।
चौपाई 10
भीम रूप धरि असुर संहारे ।
रामचंद्र के काज सँवारे ॥
भीम रूप
भयंकर विशाल रूप
असुर संहारे
राक्षसों का संहार किया
रामचंद्र के काज
श्री रामचंद्र जी के कार्य
सँवारे
सँवार दिए, पूरे किए
आपने भयंकर विशाल रूप धारण करके राक्षसों का संहार किया और श्री रामचंद्र जी के सब कार्य सँवार दिए।
चौपाई 11
लाय सजीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥
लाय
लाकर
सजीवन
संजीवनी बूटी
लखन जियाये
लक्ष्मण को जिलाया
श्रीरघुबीर
श्री राम ने
हरषि
प्रसन्न होकर
उर लाये
हृदय से लगा लिया
आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जीवित किया। इससे प्रसन्न होकर श्री राम ने आपको हृदय से लगा लिया।
चौपाई 12
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥
रघुपति
श्री राम ने
कीन्ही
की
बहुत बड़ाई
बहुत प्रशंसा
तुम मम प्रिय
तुम मुझे उतने ही प्रिय हो
भरतहि सम
भरत के समान
भाई
भाई
श्री राम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा — तुम मुझे भरत के समान प्रिय हो, मेरे भाई हो।
चौपाई 13
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥
सहस बदन
सहस्र (हज़ार) मुख वाले शेषनाग
तुम्हरो जस
तुम्हारा यश
गावैं
गाते हैं
अस कहि
ऐसा कहकर
श्रीपति
श्री राम (लक्ष्मी के पति)
कंठ लगावैं
गले लगा लिया
सहस्रमुख शेषनाग भी तुम्हारा यश गाते हैं — ऐसा कहकर श्री राम ने आपको गले से लगा लिया।
चौपाई 14
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥
सनकादिक
सनक आदि मुनि
ब्रह्मादि
ब्रह्मा आदि देवता
मुनीसा
मुनियों के ईश्वर
नारद
नारद मुनि
सारद
शारदा (सरस्वती)
अहीसा
शेषनाग
सनक आदि मुनि, ब्रह्मा आदि देवता, नारद, सरस्वती और शेषनाग — सभी आपका गुणगान करते हैं।
चौपाई 15
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥
जम
यमराज
कुबेर
कुबेर (धन के देवता)
दिगपाल
दिक्पाल (दिशाओं के रक्षक)
जहाँ ते
जहाँ तक
कबि
कवि
कोबिद
विद्वान
कहि सके कहाँ ते
कहाँ तक कह सकते हैं
यमराज, कुबेर और दिक्पाल तक आपका यश गाते हैं। कवि और विद्वान भी आपके गुणों का पूरा वर्णन कहाँ कर सकते हैं!
चौपाई 16
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।
राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥
तुम
आपने
उपकार
उपकार
सुग्रीवहिं
सुग्रीव पर
कीन्हा
किया
राम मिलाय
श्री राम से मिलाकर
राज पद
राजा का पद
दीन्हा
दिलवाया
आपने सुग्रीव पर बड़ा उपकार किया — उन्हें श्री राम से मिलवाकर राजपद दिलवाया।

चौपाई 9–16 में हनुमान जी की लंका-यात्रा, संजीवनी प्रसंग, श्री राम द्वारा उनकी प्रशंसा, देवताओं-मुनियों द्वारा उनका गुणगान और सुग्रीव प्रसंग का वर्णन है।

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