📿 हनुमान चालीसा

दोहा एवं चौपाई 1–8

हनुमान चालीसा · 1 / 5
📖 तुलसीदास (16वीं शताब्दी) द्वारा रचित
दोहा 1
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥
श्रीगुरु
श्री गुरु के
चरन सरोज
चरण-कमलों की
रज
धूल से
निज मनु
अपने मन रूपी
मुकुरु
दर्पण को
सुधारि
स्वच्छ करके
बरनउँ
वर्णन करता हूँ
रघुबर
श्री रघुनाथ जी का
बिमल जसु
निर्मल यश
दायकु
देने वाला
फल चारि
चार फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष)
गुरु के चरण-कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करके, श्री रघुनाथ जी के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ — जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, ये चारों फल देने वाला है।
दोहा 2
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥
बुद्धिहीन
बुद्धि में कमज़ोर
तनु
शरीर को
जानिके
जानकर
सुमिरौं
स्मरण करता हूँ
पवन-कुमार
पवनपुत्र हनुमान को
बल
शक्ति
बुधि
बुद्धि
बिद्या
विद्या
देहु मोहिं
मुझे दीजिए
हरहु
दूर कीजिए
कलेस बिकार
क्लेश और विकार
अपने शरीर और बुद्धि को कमज़ोर जानकर, मैं पवनपुत्र हनुमान का स्मरण करता हूँ। हे हनुमान जी, मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए तथा मेरे सब क्लेश और विकार दूर कीजिए।
चौपाई 1
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥
जय
जय हो
ज्ञान गुन सागर
ज्ञान और गुणों के सागर
कपीस
वानरों के स्वामी
तिहुँ लोक
तीनों लोकों में
उजागर
प्रसिद्ध, प्रकाशमान
हे हनुमान जी, ज्ञान और गुणों के सागर, आपकी जय हो! हे वानरराज, तीनों लोकों में आपका यश प्रकाशमान है।
चौपाई 2
राम दूत अतुलित बल धामा ।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥
राम दूत
श्री राम के दूत
अतुलित
जिसकी तुलना न हो सके
बल धामा
बल के धाम
अंजनि-पुत्र
माता अंजना के पुत्र
पवनसुत
पवन (वायु) के पुत्र
नामा
नाम वाले
आप श्री राम के दूत हैं और अतुलनीय बल के धाम हैं। माता अंजना के पुत्र हैं और पवनसुत के नाम से जाने जाते हैं।
चौपाई 3
महाबीर बिक्रम बजरंगी ।
कुमति निवार सुमति के संगी ॥
महाबीर
महावीर
बिक्रम
पराक्रमी
बजरंगी
वज्र के समान शरीर वाले
कुमति निवार
बुरी बुद्धि को दूर करने वाले
सुमति के संगी
अच्छी बुद्धि के साथी
आप महावीर, पराक्रमी और वज्र के समान कठोर शरीर वाले हैं। आप बुरी बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी बुद्धि के सदा साथी हैं।
चौपाई 4
कंचन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुंडल कुंचित केसा ॥
कंचन बरन
सोने के समान वर्ण
बिराज
शोभित
सुबेसा
सुंदर वेश
कानन कुंडल
कानों में कुंडल
कुंचित केसा
घुँघराले बाल
आपका शरीर सोने जैसे वर्ण का है और सुंदर वेशभूषा में शोभित है। कानों में कुंडल हैं और बाल घुँघराले हैं।
चौपाई 5
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥
हाथ
हाथ में
बज्र
गदा
ध्वजा
ध्वजा (पताका)
बिराजै
शोभित हैं
काँधे
कंधे पर
मूँज जनेऊ
मूँज का जनेऊ
साजै
सुशोभित है
आपके हाथ में गदा और ध्वजा शोभित हैं। कंधे पर मूँज का पवित्र जनेऊ सुशोभित है।
चौपाई 6
शंकर सुवन केसरीनंदन ।
तेज प्रताप महा जग बंदन ॥
शंकर सुवन
शंकर (शिव) के अंश
केसरीनंदन
केसरी के पुत्र
तेज
तेज
प्रताप
प्रताप
महा
महान
जग बंदन
संसार में वंदनीय
आप शिव के अंश और केसरी नंदन हैं। आपका तेज और प्रताप महान है और सारा संसार आपकी वंदना करता है।
चौपाई 7
बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥
बिद्यावान
विद्वान
गुनी
गुणवान
अति चातुर
अत्यंत चतुर
राम काज
श्री राम का कार्य
करिबे को
करने के लिए
आतुर
सदा तत्पर
आप विद्वान, गुणवान और अत्यंत चतुर हैं। श्री राम का कार्य करने के लिए आप सदा तत्पर रहते हैं।
चौपाई 8
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥
प्रभु चरित्र
प्रभु (श्री राम) की कथा
सुनिबे को
सुनने के
रसिया
रसिक, प्रेमी
राम लखन सीता
श्री राम, लक्ष्मण और सीता
मन बसिया
मन में बसे हैं
आप प्रभु श्री राम की कथा सुनने में सदा आनंदित रहते हैं। श्री राम, लक्ष्मण और सीता सदा आपके मन में बसे हुए हैं।

इस भाग में हनुमान चालीसा के दो प्रारंभिक दोहे और प्रथम आठ चौपाई हैं। पहले दोहे में गोस्वामी तुलसीदास गुरु-वंदना करते हैं और दूसरे में हनुमान जी से बल-बुद्धि-विद्या की प्रार्थना करते हैं। चौपाई 1–8 में हनुमान जी के रूप, गुण और श्री राम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति का वर्णन है।

हनुमान चालीसा · 1 / 5
हनुमान चालीसा · 1 / 5 अगला →