बारहवाँ शक्तिपीठ

शृंखल

जहाँ सती का गण्ड गिरा — हुगली का शांकरी पीठ
📍 पाण्डुआ, हुगली, पश्चिम बंगाल, भारत
सती का अंग
गण्ड (गाल)
शक्ति
विश्वेश्वरी (शांकरी)
भैरव
चन्द्रशेखर
📖 देवी भागवत पुराण, सप्तम स्कन्ध

देवी भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में बताया गया है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्यागे, तब भगवान शिव उनके शव को लेकर विलाप करते हुए भटकने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभक्त किया। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

परंपरा में कहा गया है कि इस स्थान पर सती का गण्ड गिरा। यहाँ शक्ति विश्वेश्वरी (शांकरी) के रूप में और शिव चन्द्रशेखर भैरव के रूप में विराजित माने जाते हैं। पीठनिर्णय तंत्र में इस स्थान को इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना गया है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार यहाँ सती का गण्ड गिरा — यहाँ शक्ति विश्वेश्वरी (शांकरी) और भैरव चन्द्रशेखर विराजित हैं।

शृंखल शक्तिपीठ पाण्डुआ, हुगली, पश्चिम बंगाल, भारत में स्थित है। परंपरा में इसे इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता रहा है। यहाँ शक्ति विश्वेश्वरी (शांकरी) के रूप में पूजित हैं और भैरव का रूप चन्द्रशेखर माना गया है।

भक्त दूर-दूर से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि और अन्य देवी पर्वों पर यहाँ विशेष भीड़ देखी जाती है।

स्थान
पाण्डुआ, हुगली, पश्चिम बंगाल, भारत
सती का अंग
गण्ड (गाल)
शक्ति
विश्वेश्वरी (शांकरी)
भैरव
चन्द्रशेखर
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डे से पाण्डुआ पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन से पाण्डुआ सड़क मार्ग से जुड़ा है।
🚗
सड़क मार्ग
पाण्डुआ सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। स्थानीय बस और टैक्सी उपलब्ध रहती हैं।
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