इक्यावनवाँ शक्तिपीठ

बक्रेश्वर

जहाँ सती के चक्षु गिरे — बीरभूम का बक्रेश्वर पीठ
📍 बक्रेश्वर, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत
सती का अंग
चक्षु (नेत्र/आँखें)
शक्ति
महिषासुरमर्दिनी
भैरव
क्रोधीश
📖 देवी भागवत पुराण, सप्तम स्कन्ध

देवी भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में बताया गया है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्यागे, तब भगवान शिव उनके शव को लेकर विलाप करते हुए भटकने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभक्त किया। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

परंपरा में कहा गया है कि इस स्थान पर सती का चक्षु गिरा। यहाँ शक्ति महिषासुरमर्दिनी के रूप में और शिव क्रोधीश भैरव के रूप में विराजित माने जाते हैं। पीठनिर्णय तंत्र में इस स्थान को इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना गया है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार यहाँ सती का चक्षु गिरा — यहाँ शक्ति महिषासुरमर्दिनी और भैरव क्रोधीश विराजित हैं।

बक्रेश्वर शक्तिपीठ बक्रेश्वर, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत में स्थित है। परंपरा में इसे इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता रहा है। यहाँ शक्ति महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजित हैं और भैरव का रूप क्रोधीश माना गया है।

भक्त दूर-दूर से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि और अन्य देवी पर्वों पर यहाँ विशेष भीड़ देखी जाती है।

स्थान
बक्रेश्वर, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत
सती का अंग
चक्षु (नेत्र/आँखें)
शक्ति
महिषासुरमर्दिनी
भैरव
क्रोधीश
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डे से बक्रेश्वर पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन से बक्रेश्वर सड़क मार्ग से जुड़ा है।
🚗
सड़क मार्ग
बक्रेश्वर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। स्थानीय बस और टैक्सी उपलब्ध रहती हैं।
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