देवी भागवत पुराण के सप्तम स्कंध में बताया गया है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्यागे, तब भगवान शिव उनके शव को लेकर विलाप करते हुए भटकने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को विभक्त किया। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।
परंपरा में कहा गया है कि इस स्थान पर सती का दोनों कर्ण गिरा। यहाँ शक्ति जय दुर्गा के रूप में और शिव अभीरु भैरव के रूप में विराजित माने जाते हैं। पीठनिर्णय तंत्र में इस स्थान को इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना गया है।
देवी भागवत पुराण के अनुसार यहाँ सती का दोनों कर्ण गिरा — यहाँ शक्ति जय दुर्गा और भैरव अभीरु विराजित हैं।
कर्णाट शक्तिपीठ कर्णाट क्षेत्र, कर्नाटक, भारत में स्थित है। परंपरा में इसे इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता रहा है। यहाँ शक्ति जय दुर्गा के रूप में पूजित हैं और भैरव का रूप अभीरु माना गया है।
भक्त दूर-दूर से यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि और अन्य देवी पर्वों पर यहाँ विशेष भीड़ देखी जाती है।
- मंदिर में प्रतिदिन दर्शन होते हैं।
- नवरात्रि पर विशेष पूजा और उत्सव होता है।
- शारदीय और चैत्र नवरात्रि दोनों में भक्तों की भीड़ रहती है।