नौवाँ ज्योतिर्लिंग

वैद्यनाथ

रावण की भक्ति से जुड़ा शिव का नौवाँ ज्योतिर्लिंग
📍 देवघर (झारखंड) / परली (महाराष्ट्र) — दो परंपराएँ
स्थान
देवघर (झारखंड) और परली (महाराष्ट्र) — दो परंपराएँ
विशेष
रावण की कठोर तपस्या का स्थान
क्रम
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में नौवाँ
📖 शिव पुराण

शिव पुराण के अनुसार लंका के राजा रावण भगवान शिव के परम भक्त थे। वे चाहते थे कि शिव लंका में सदैव के लिए विराजित हों। इसी इच्छा से उन्होंने कैलाश पर्वत पर कठोर तपस्या की।

शिव पुराण में बताया गया है कि शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए और एक शिवलिंग दिया। शर्त यह थी कि रावण इस शिवलिंग को कहीं ज़मीन पर नहीं रखेंगे — यदि रखा, तो शिवलिंग वहीं स्थापित हो जाएगा।

देवताओं को यह बात उचित नहीं लगी। उन्होंने मिलकर एक उपाय किया जिससे रावण को शिवलिंग ज़मीन पर रखना पड़ा। शिव पुराण के अनुसार उसी क्षण शिवलिंग वहीं स्थापित हो गया।

यहीं भगवान शिव वैद्यनाथ के नाम से विराजित हैं। वैद्य का अर्थ चिकित्सक है, और नाथ का अर्थ स्वामी। दो परंपराएँ प्रचलित हैं — एक झारखंड के देवघर को इस स्थान के रूप में मानती है, दूसरी महाराष्ट्र के परली वैजनाथ को। शिव पुराण में दोनों परंपराओं के संदर्भ मिलते हैं।

शिव पुराण में रावण की भक्ति से जुड़ी इस कथा का विस्तृत वर्णन मिलता है।

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की एक विशेष परंपरा यह है कि यहाँ दो स्थानों को इस ज्योतिर्लिंग के रूप में माना जाता रहा है। उत्तर भारत की परंपरा में देवघर (झारखंड) को मान्यता मिली है। महाराष्ट्र की परंपरा में परली वैजनाथ को इस स्थान के रूप में पूजा जाता रहा है। दोनों स्थानों पर पुराण ग्रंथों के संदर्भ मिलते हैं।

देवघर का मंदिर परिसर बैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता रहा है। श्रावण मास में यहाँ कांवर यात्रा की परंपरा रही है, जिसमें भक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर पैदल आते आए हैं। परली वैजनाथ का मंदिर भी प्राचीन है और महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में स्थित है।

दो परंपराएँ
देवघर (झारखंड) और परली वैजनाथ (महाराष्ट्र)
देवघर परंपरा
बैद्यनाथ धाम — संथाल परगना क्षेत्र में
परली परंपरा
मराठवाड़ा, बीड ज़िला, महाराष्ट्र
विशेष
श्रावण मास में कांवर यात्रा की प्राचीन परंपरा
✈️
हवाई मार्ग
देवघर — रांची या पटना हवाई अड्डा। परली — औरंगाबाद हवाई अड्डा सबसे पास।
🚂
रेल मार्ग
देवघर रेलवे स्टेशन और परली वैजनाथ रेलवे स्टेशन — दोनों सीधे रेल मार्ग से जुड़े हैं।
🚗
सड़क मार्ग
देवघर रांची से लगभग 250 किलोमीटर। परली औरंगाबाद से लगभग 200 किलोमीटर।
🛕
विशेष
देवघर में श्रावण मास के समय सुल्तानगंज से कांवर यात्रा की परंपरा है।
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