दसवाँ ज्योतिर्लिंग

नागेश्वर

द्वारका के पास नागों के स्वामी शिव का धाम
📍 द्वारका, गुजरात
स्थान
द्वारका के पास, देवभूमि द्वारका ज़िला, गुजरात
विशेष
नागों के स्वामी शिव का स्थान
क्रम
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में दसवाँ
📖 शिव पुराण

शिव पुराण के अनुसार सुप्रिय नामक एक वैश्य भगवान शिव के परम भक्त थे। एक बार जब वे समुद्र मार्ग से जा रहे थे, तब दारुक नामक एक राक्षस ने उन पर आक्रमण किया।

सुप्रिय ने पूरी श्रद्धा से शिव का स्मरण किया। शिव पुराण में बताया गया है कि शिव अपने भक्त की रक्षा के लिए नागेश्वर के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने भक्त की रक्षा की।

शिव यहाँ नागेश्वर के नाम से विराजित हैं। नाग का अर्थ सर्प है, और ईश्वर का अर्थ स्वामी। पुराण परंपरा में शिव को नागों का स्वामी माना जाता रहा है — उनके गले में सर्प माला रहती है।

मंदिर द्वारका के पास स्थित है। यह क्षेत्र अरब सागर के तट के पास है। पुराण ग्रंथों में इस पूरे क्षेत्र को द्वारका माहात्म्य के अंतर्गत वर्णित किया गया है।

शिव पुराण के अनुसार नागेश्वर का यह स्थान भक्त सुप्रिय की रक्षा से जुड़ा हुआ है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के देवभूमि द्वारका ज़िले में स्थित है। यह द्वारका धाम के निकट है — जो चार धामों में से एक है। इसी कारण द्वारका यात्रा करने वाले भक्त नागेश्वर के दर्शन के लिए भी आते आए हैं।

मंदिर परिसर में शिव की एक विशाल बैठी हुई मूर्ति भी है। यह मूर्ति आधुनिक है, पर मंदिर का शिवलिंग प्राचीन माना जाता रहा है। पुराण परंपरा में इस स्थान का माहात्म्य द्वारका क्षेत्र के साथ जुड़ा हुआ है।

स्थान
द्वारका के पास, अरब सागर तट के निकट
क्षेत्र
देवभूमि द्वारका ज़िला, गुजरात
निकट
द्वारका धाम — चार धामों में से एक
विशेष
नागों के स्वामी शिव का स्थान
✈️
हवाई मार्ग
जामनगर हवाई अड्डा लगभग 145 किलोमीटर दूर है।
🚂
रेल मार्ग
द्वारका रेलवे स्टेशन सबसे पास है। यहाँ से नागेश्वर लगभग 17 किलोमीटर दूर है।
🚗
सड़क मार्ग
द्वारका से लगभग 17 किलोमीटर। गुजरात राज्य की बसें और टैक्सियाँ नियमित चलती हैं।
🛕
विशेष
द्वारका धाम और नागेश्वर — दोनों की यात्रा एक साथ की जाती रही है।
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