शिव पुराण के अनुसार सुप्रिय नामक एक वैश्य भगवान शिव के परम भक्त थे। एक बार जब वे समुद्र मार्ग से जा रहे थे, तब दारुक नामक एक राक्षस ने उन पर आक्रमण किया।
सुप्रिय ने पूरी श्रद्धा से शिव का स्मरण किया। शिव पुराण में बताया गया है कि शिव अपने भक्त की रक्षा के लिए नागेश्वर के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने भक्त की रक्षा की।
शिव यहाँ नागेश्वर के नाम से विराजित हैं। नाग का अर्थ सर्प है, और ईश्वर का अर्थ स्वामी। पुराण परंपरा में शिव को नागों का स्वामी माना जाता रहा है — उनके गले में सर्प माला रहती है।
मंदिर द्वारका के पास स्थित है। यह क्षेत्र अरब सागर के तट के पास है। पुराण ग्रंथों में इस पूरे क्षेत्र को द्वारका माहात्म्य के अंतर्गत वर्णित किया गया है।
शिव पुराण के अनुसार नागेश्वर का यह स्थान भक्त सुप्रिय की रक्षा से जुड़ा हुआ है।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के देवभूमि द्वारका ज़िले में स्थित है। यह द्वारका धाम के निकट है — जो चार धामों में से एक है। इसी कारण द्वारका यात्रा करने वाले भक्त नागेश्वर के दर्शन के लिए भी आते आए हैं।
मंदिर परिसर में शिव की एक विशाल बैठी हुई मूर्ति भी है। यह मूर्ति आधुनिक है, पर मंदिर का शिवलिंग प्राचीन माना जाता रहा है। पुराण परंपरा में इस स्थान का माहात्म्य द्वारका क्षेत्र के साथ जुड़ा हुआ है।
- मंदिर वर्ष भर खुला रहता है। भक्त यहाँ रोज़ दर्शन के लिए आते आए हैं।
- द्वारका धाम की यात्रा करने वाले भक्त यहाँ भी दर्शन के लिए आते रहे हैं।
- मंदिर परिसर में शिव की विशाल बैठी मूर्ति भी देखी जा सकती है।
- महाशिवरात्रि और श्रावण मास में मंदिर में विशेष भीड़ रहती है।