ग्यारहवाँ ज्योतिर्लिंग

रामेश्वर

भगवान राम द्वारा स्थापित समुद्र किनारे का शिव धाम
📍 रामेश्वरम, तमिलनाडु
स्थान
रामेश्वरम द्वीप, रामनाथपुरम ज़िला, तमिलनाडु
सागर
हिंद महासागर के तट पर
क्रम
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवाँ
📖 वाल्मीकि रामायण युद्ध काण्ड और शिव पुराण

वाल्मीकि रामायण के युद्ध काण्ड में बताया गया है कि भगवान राम लंका पर चढ़ाई के पहले इसी स्थान पर रुके थे। वे शिव के परम भक्त थे और लंका जाने से पहले शिव की पूजा करना चाहते थे।

रामायण के अनुसार राम ने यहाँ एक शिवलिंग की स्थापना की और शिव की पूजा की। यह शिवलिंग बालू से बनाया गया था, क्योंकि उस समय कोई पत्थर का शिवलिंग पास उपलब्ध नहीं था।

शिव पुराण में भी इस स्थान का उल्लेख मिलता है। इसी कारण भगवान शिव यहाँ रामेश्वर के नाम से विराजित हैं। रामेश्वर का अर्थ है — राम के ईश्वर, अर्थात राम के द्वारा पूजित शिव।

मंदिर रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है। यह द्वीप तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी छोर पर है। यहाँ से लंका की दूरी कम है। रामायण में इसी क्षेत्र से सेतु बनने का प्रसंग भी आता है।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम ने स्वयं इसी स्थान पर शिव की पूजा की थी।

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि यह बारह ज्योतिर्लिंगों में अकेला ऐसा स्थान है जो चार धामों में भी गिना जाता है। यह रामेश्वरम मुख्य भारत का दक्षिणतम चार धाम स्थल है।

रामनाथस्वामी मंदिर का स्थापत्य द्रविड़ शैली में है। मंदिर के गलियारे (कॉरिडोर) अपनी लंबाई के लिए जाने जाते हैं — यह भारत के सबसे लंबे मंदिर गलियारों में से एक माना जाता रहा है। मंदिर परिसर में 22 तीर्थ कुंड भी हैं।

स्थान
रामेश्वरम द्वीप, तमिलनाडु
सागर
हिंद महासागर का तट
विशेष
बारह ज्योतिर्लिंगों में अकेला, जो चार धाम में भी है
मंदिर
द्रविड़ शैली, लंबे गलियारों के लिए जाना जाता है
✈️
हवाई मार्ग
मदुरै हवाई अड्डा लगभग 170 किलोमीटर दूर है।
🚂
रेल मार्ग
रामेश्वरम रेलवे स्टेशन द्वीप पर ही है। चेन्नई और मदुरै से सीधी गाड़ियाँ चलती हैं।
🚗
सड़क मार्ग
मदुरै से लगभग 170 किलोमीटर। तमिलनाडु राज्य की बसें नियमित चलती हैं।
🌉
विशेष
मुख्य भूमि से रामेश्वरम द्वीप तक पंबन पुल — समुद्र पर बना एक सुंदर पुल।
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