आठवाँ ज्योतिर्लिंग

त्र्यंबकेश्वर

गोदावरी के उद्गम पर स्थित त्रिनेत्र शिव का धाम
📍 नासिक, महाराष्ट्र
स्थान
त्र्यंबक, नासिक ज़िला, महाराष्ट्र
नदी
गोदावरी का उद्गम स्थल — ब्रह्मगिरि पर्वत
क्रम
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में आठवाँ
📖 शिव पुराण और ब्रह्म पुराण का गौतमी माहात्म्य

ब्रह्म पुराण के गौतमी माहात्म्य के अनुसार यहाँ ऋषि गौतम का आश्रम था। पुराण में कथा आती है कि एक बार पूरे क्षेत्र में अकाल पड़ा। ऋषि गौतम ने अपनी तपस्या से अन्न और जल की व्यवस्था की।

अन्य ऋषियों के साथ हुए मतभेद के पश्चात गौतम ऋषि ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे गंगा को इस क्षेत्र में ले आएँ। शिव ने उनकी प्रार्थना सुनी।

गंगा यहाँ गोदावरी के रूप में प्रकट हुईं। ब्रह्मगिरि पर्वत से गोदावरी का उद्गम होता है। इसी कारण गोदावरी को दक्षिण की गंगा भी कहा जाता रहा है।

भगवान शिव यहाँ त्र्यंबकेश्वर के नाम से विराजित हैं। त्र्यंबक का अर्थ है तीन नेत्रों वाले। यह नाम शिव के त्रिनेत्र स्वरूप का प्रतीक है। मंदिर में शिवलिंग की तीन छोटी मुखाकृतियाँ हैं — जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और शिव के प्रतीक माना जाता रहा है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पास ब्रह्मगिरि पर्वत से ही गोदावरी नदी का उद्गम होता है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि यह गोदावरी के उद्गम स्थल पर स्थित है। नासिक कुंभ मेला के चार स्थलों में से एक है। यहाँ हर बारह वर्ष में सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता आया है।

मंदिर का स्थापत्य काले पत्थर से बना नागर शैली में है। ब्रह्मगिरि पर्वत मंदिर के पीछे स्थित है। पर्वत पर परिक्रमा का मार्ग है, जो परंपरागत रूप से तीर्थयात्रा का हिस्सा रहा है।

नदी
गोदावरी का उद्गम स्थल
पर्वत
ब्रह्मगिरि पर्वत मंदिर के पीछे
स्थापत्य
काले पत्थर का नागर शैली का मंदिर
कुंभ मेला
चार सिंहस्थ कुंभ स्थलों में से एक
✈️
हवाई मार्ग
मुंबई हवाई अड्डा लगभग 200 किलोमीटर दूर है। नासिक हवाई अड्डा भी पास में है।
🚂
रेल मार्ग
नासिक रोड रेलवे स्टेशन लगभग 35 किलोमीटर दूर है। यहाँ से सड़क मार्ग से आगे जाना होता है।
🚗
सड़क मार्ग
मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर, पुणे से लगभग 220 किलोमीटर। महाराष्ट्र राज्य की बसें नियमित चलती हैं।
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विशेष
मंदिर के पीछे ब्रह्मगिरि पर्वत — परिक्रमा परंपरागत रूप से की जाती रही है।
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