चौथा ज्योतिर्लिंग

ओंकारेश्वर

नर्मदा नदी के बीच ओम-आकार के द्वीप पर बसा शिव धाम
📍 खंडवा, मध्य प्रदेश
स्थान
मांधाता द्वीप, खंडवा ज़िला, मध्य प्रदेश
नदी
नर्मदा नदी के बीच
क्रम
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में चौथा
📖 शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता

शिव पुराण के अनुसार एक बार देवताओं और दानवों के बीच युद्ध हुआ। दानव विजयी हो रहे थे। तब देवताओं ने मिलकर भगवान शिव की आराधना की। शिव उनकी पुकार पर प्रसन्न हुए और ज्योतिर्लिंग के रूप में यहाँ प्रकट हुए।

इसी क्षेत्र में राजा मांधाता ने भी कठोर तपस्या की थी। शिव पुराण में बताया गया है कि शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर इस द्वीप पर सदैव के लिए निवास करने का वचन दे दिया।

इस द्वीप का आकार ऊपर से देखने पर ओम (ॐ) के समान दिखाई देता है। इसी कारण इस स्थान का नाम ओंकारेश्वर पड़ा। ओंकार का अर्थ ही ओम का स्वर है।

मंदिर नर्मदा नदी के बीच मांधाता द्वीप पर स्थित है। यहाँ एक ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के रूप में और दूसरा अमलेश्वर के रूप में पास के तट पर माना जाता रहा है।

मांधाता द्वीप का आकार ऊपर से देखने पर ओम (ॐ) के समान दिखाई देता है — इसी कारण इस स्थान का नाम ओंकारेश्वर पड़ा।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की भौगोलिक स्थिति विशेष है। यह नर्मदा नदी के बीच एक प्राकृतिक द्वीप पर स्थित है। नर्मदा यहाँ दो धाराओं में बँटकर द्वीप के दोनों ओर बहती है। यह दृश्य अपने आप में अनोखा है।

नर्मदा नदी पुराण परंपरा में अत्यंत पवित्र मानी जाती रही है। पुराणों में नर्मदा परिक्रमा का माहात्म्य वर्णित है। ओंकारेश्वर इस परिक्रमा का एक प्रमुख विश्राम स्थल भी रहा है।

नदी
नर्मदा नदी के बीच मांधाता द्वीप पर
आकार
द्वीप का आकार ओम (ॐ) के समान
विशेष
एक स्थान पर दो शिव स्वरूप — ओंकारेश्वर और अमलेश्वर
परिक्रमा
नर्मदा परिक्रमा का प्रमुख स्थल
✈️
हवाई मार्ग
इंदौर हवाई अड्डा लगभग 80 किलोमीटर दूर है।
🚂
रेल मार्ग
ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन लगभग 12 किलोमीटर दूर है। इंदौर और खंडवा से भी रेल सुलभ है।
🚗
सड़क मार्ग
इंदौर से लगभग 80 किलोमीटर, खंडवा से लगभग 70 किलोमीटर। मध्य प्रदेश की बसें नियमित चलती हैं।
विशेष
द्वीप तक पहुँचने के लिए नर्मदा पर पुल है। पहले नौका से यात्रा होती थी।
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