पाँचवाँ ज्योतिर्लिंग

केदारनाथ

भगवान शिव का पर्वतीय धाम
📍 रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड · 3,583 मीटर
खुलने का समय
मई – नवम्बर
निकटतम शहर
गौरीकुंड
यात्रा का प्रकार
16 कि.मी. पैदल
📖 शिव पुराण एवं स्कंद पुराण पर आधारित

महाभारत युद्ध के पश्चात पांडव अपने कुल के विनाश और स्वजनों की हत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे। वे भगवान शिव का आशीर्वाद लेने निकले।

शिव पांडवों से रुष्ट थे, इसलिए उन्होंने बैल का रूप धारण कर हिमालय में छुपने का प्रयास किया। भीम ने उन्हें पहचान लिया और बैल की पीठ को पकड़ लिया।

भगवान शिव बैल के रूप में भूमि में अंतर्ध्यान हो गए — केवल उनका कूबड़ (पृष्ठभाग) वहाँ रह गया। वही आज केदारनाथ का शिवलिंग है।

शिव के शरीर के अन्य भाग अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए — जिन्हें आज पंचकेदार के नाम से जाना जाता है।

केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और छोटा चार धाम यात्रा का अभिन्न अंग है। हिमालय की गोद में बसा यह मंदिर प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम है।

यहाँ का शिवलिंग त्रिकोणाकार है — यह अन्य ज्योतिर्लिंगों से भिन्न है। भक्त इसे घी लगाकर पूजते हैं और इसे स्पर्श कर सकते हैं।

मंदिर कब बना
आदि शंकराचार्य द्वारा 8वीं शताब्दी में जीर्णोद्धार
ऊँचाई
3,583 मीटर (11,755 फ़ीट)
नदी
मंदाकिनी नदी के तट पर
शीतकाल
देवता उखीमठ ले जाए जाते हैं
✈️
निकटतम हवाई अड्डा
जॉली ग्रांट, देहरादून — लगभग 250 कि.मी. दूर
🚂
निकटतम रेलवे स्टेशन
ऋषिकेश — 216 कि.मी. · हरिद्वार — 229 कि.मी.
🚌
सड़क मार्ग
गौरीकुंड तक बस/टैक्सी, फिर 16 कि.मी. की पैदल यात्रा। खच्चर और पालकी भी उपलब्ध।
🚁
हेलीकॉप्टर सेवा
फाटा, सिरसी और गुप्तकाशी से हेली सेवा उपलब्ध (सीमित सीटें, पहले से बुकिंग ज़रूरी)
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