दूसरा ज्योतिर्लिंग

मल्लिकार्जुन

श्रीशैलम पर्वत पर शिव और देवी का संयुक्त धाम
📍 श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश
स्थान
श्रीशैलम पर्वत, कुरनूल ज़िला, आंध्र प्रदेश
नदी
कृष्णा नदी के तट पर
क्रम
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में दूसरा
📖 शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता और स्कंद पुराण

शिव पुराण के अनुसार एक बार शिव और पार्वती के दोनों पुत्रों — कार्तिकेय और गणेश — के बीच यह बात उठी कि पहले विवाह किसका होगा। शिव और पार्वती ने कहा कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटेगा, उसी का विवाह पहले होगा।

कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर परिक्रमा के लिए निकल पड़े। गणेश ने अपनी बुद्धि से अपने माता-पिता शिव और पार्वती की ही परिक्रमा की और कहा कि माता-पिता ही मेरा संसार हैं। उनकी बुद्धि से प्रसन्न होकर शिव और पार्वती ने गणेश का विवाह पहले करा दिया।

जब कार्तिकेय परिक्रमा से लौटे और यह जाना, तो वे रुष्ट होकर दक्षिण के क्रौंच पर्वत पर चले गए। माता-पिता उन्हें मनाने के लिए वहाँ गए। शिव पुराण में बताया गया है कि शिव और पार्वती तब से उसी पर्वत पर विराजित हैं।

इसी स्थान पर शिव मल्लिकार्जुन के नाम से और पार्वती भ्रामराम्बा के नाम से पूजित हैं। मल्लिका का अर्थ है चमेली का फूल, और अर्जुन शिव का एक नाम है। यह दक्षिण भारत का प्रमुख शिव क्षेत्र माना जाता रहा है।

श्रीशैलम पर शिव मल्लिकार्जुन के रूप में और देवी भ्रामराम्बा के रूप में एक साथ विराजित मानी जाती हैं।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि यहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ — दोनों एक ही स्थान पर हैं। शिव पुराण और देवी भागवत — दोनों ग्रंथों में इस स्थान का उल्लेख मिलता है। यह दक्षिण भारत का अत्यंत प्राचीन शिव तीर्थ माना जाता रहा है।

श्रीशैलम पर्वत नल्लामल पहाड़ियों के बीच बसा है। मंदिर के पास से कृष्णा नदी बहती है। यह पूरा क्षेत्र वनों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहाँ विशेष परंपरा रही है।

स्थान
नल्लामल पहाड़ियों के बीच श्रीशैलम पर्वत पर
नदी
कृष्णा नदी
विशेष
ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ — दोनों एक स्थान पर
देवी
देवी भ्रामराम्बा भी यहाँ विराजित मानी जाती हैं
✈️
हवाई मार्ग
हैदराबाद हवाई अड्डा सबसे पास है — लगभग 230 किलोमीटर दूर।
🚂
रेल मार्ग
मार्कापुर रोड रेलवे स्टेशन लगभग 85 किलोमीटर दूर है। कुरनूल और हैदराबाद से भी रेल सुलभ है।
🚗
सड़क मार्ग
हैदराबाद से लगभग 230 किलोमीटर। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की बसें नियमित चलती हैं।
🛕
विशेष
नल्लामल पहाड़ियों का घुमावदार रास्ता — पूरा सफ़र वनों के बीच से गुज़रता है।
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