शिव पुराण के अनुसार एक बार शिव और पार्वती के दोनों पुत्रों — कार्तिकेय और गणेश — के बीच यह बात उठी कि पहले विवाह किसका होगा। शिव और पार्वती ने कहा कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटेगा, उसी का विवाह पहले होगा।
कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर परिक्रमा के लिए निकल पड़े। गणेश ने अपनी बुद्धि से अपने माता-पिता शिव और पार्वती की ही परिक्रमा की और कहा कि माता-पिता ही मेरा संसार हैं। उनकी बुद्धि से प्रसन्न होकर शिव और पार्वती ने गणेश का विवाह पहले करा दिया।
जब कार्तिकेय परिक्रमा से लौटे और यह जाना, तो वे रुष्ट होकर दक्षिण के क्रौंच पर्वत पर चले गए। माता-पिता उन्हें मनाने के लिए वहाँ गए। शिव पुराण में बताया गया है कि शिव और पार्वती तब से उसी पर्वत पर विराजित हैं।
इसी स्थान पर शिव मल्लिकार्जुन के नाम से और पार्वती भ्रामराम्बा के नाम से पूजित हैं। मल्लिका का अर्थ है चमेली का फूल, और अर्जुन शिव का एक नाम है। यह दक्षिण भारत का प्रमुख शिव क्षेत्र माना जाता रहा है।
श्रीशैलम पर शिव मल्लिकार्जुन के रूप में और देवी भ्रामराम्बा के रूप में एक साथ विराजित मानी जाती हैं।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि यहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ — दोनों एक ही स्थान पर हैं। शिव पुराण और देवी भागवत — दोनों ग्रंथों में इस स्थान का उल्लेख मिलता है। यह दक्षिण भारत का अत्यंत प्राचीन शिव तीर्थ माना जाता रहा है।
श्रीशैलम पर्वत नल्लामल पहाड़ियों के बीच बसा है। मंदिर के पास से कृष्णा नदी बहती है। यह पूरा क्षेत्र वनों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहाँ विशेष परंपरा रही है।
- मंदिर वर्ष भर खुला रहता है और भक्त यहाँ रोज़ दर्शन के लिए आते आए हैं।
- मंदिर परिसर में मल्लिकार्जुन और भ्रामराम्बा — दोनों के दर्शन होते हैं।
- महाशिवरात्रि के समय यहाँ बड़ा उत्सव होता है।
- मंदिर के पास से कृष्णा नदी और पहाड़ों का सुंदर दृश्य दिखता है।