सातवाँ ज्योतिर्लिंग

काशी विश्वनाथ

गंगा के तट पर बसा अत्यंत प्राचीन शिव क्षेत्र
📍 वाराणसी (काशी), उत्तर प्रदेश
स्थान
वाराणसी, उत्तर प्रदेश
नदी
गंगा के तट पर
क्रम
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सातवाँ
📖 शिव पुराण और स्कंद पुराण की काशी खण्ड

स्कंद पुराण की काशी खण्ड में काशी का विस्तृत माहात्म्य वर्णित है। पुराण के अनुसार काशी भगवान शिव की प्रिय नगरी मानी जाती रही है। शिव यहाँ सदैव विराजते हैं — इसी कारण इसे काशी विश्वनाथ कहा जाता है। विश्वनाथ का अर्थ है विश्व के नाथ।

शिव पुराण में काशी को त्रिशूल के ऊपर बसी हुई नगरी के रूप में वर्णित किया गया है। पुराण परंपरा में यह माना जाता रहा है कि काशी पृथ्वी पर नहीं, बल्कि शिव के त्रिशूल पर टिकी है — इसलिए यह सदैव शाश्वत मानी जाती रही है।

काशी का उल्लेख वेदों और उपनिषदों में भी मिलता है। यह भारत के सबसे पुराने निवास स्थलों में से एक माना जाता रहा है। पुराण ग्रंथों में इसे अविमुक्त क्षेत्र भी कहा गया है।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग गंगा के पश्चिमी तट पर स्थित है। मंदिर के पास ही दशाश्वमेध, मणिकर्णिका और कई अन्य प्राचीन घाट हैं। यह पूरा क्षेत्र शिव परंपरा का केंद्र माना जाता रहा है।

स्कंद पुराण की काशी खण्ड में काशी को शिव की प्रिय नगरी और अविमुक्त क्षेत्र कहा गया है।

काशी सप्त पुरियों में से एक है और भारत के अत्यंत प्राचीन तीर्थ क्षेत्रों में गिनी जाती रही है। पुराणों में इसे आनंद वन, अविमुक्त और रुद्रावास जैसे नामों से भी पुकारा गया है। यहाँ की गलियाँ, घाट और मंदिर एक हज़ार वर्षों से भी अधिक समय से तीर्थयात्रियों का स्वागत करते आए हैं।

गंगा के घाटों पर सुबह और शाम की आरती परंपरा का एक विशेष अंग रही है। दशाश्वमेध घाट पर शाम की गंगा आरती सबसे प्रसिद्ध परंपराओं में से एक मानी जाती रही है। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहाँ विशेष परंपरा देखी जाती है।

नदी
गंगा के पश्चिमी तट पर
नगर
वाराणसी (काशी) — सप्त पुरियों में से एक
घाट
दशाश्वमेध, मणिकर्णिका सहित कई प्राचीन घाट पास
विशेष
वेद, उपनिषद और पुराणों में उल्लेखित
✈️
हवाई मार्ग
लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा (बाबतपुर) लगभग 25 किलोमीटर दूर है।
🚂
रेल मार्ग
वाराणसी जंक्शन (कैंट) शहर के केंद्र में है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और सभी प्रमुख शहरों से सीधी गाड़ियाँ चलती हैं।
🚗
सड़क मार्ग
लखनऊ से लगभग 320 किलोमीटर, प्रयागराज से लगभग 120 किलोमीटर। राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा हुआ है।
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विशेष
मंदिर पुराने शहर के बीच है — गलियों से होकर पैदल पहुँचना होता है।
7 / 12 त्र्यंबकेश्वर →