पूर्व का धाम

जगन्नाथ पुरी

बंगाल की खाड़ी के तट पर बसा भगवान जगन्नाथ का धाम
📍 पुरी, ओडिशा
स्थान
पुरी शहर, ओडिशा
सागर
बंगाल की खाड़ी का तट
देवता
जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा
📖 स्कंद पुराण की पुरुषोत्तम क्षेत्र माहात्म्य और ब्रह्म पुराण

स्कंद पुराण के पुरुषोत्तम क्षेत्र माहात्म्य में पुरी का विस्तृत वर्णन मिलता है। पुराण के अनुसार यह क्षेत्र भगवान विष्णु का प्रिय निवास माना जाता रहा है।

पुराण में कथा आती है कि राजा इंद्रद्युम्न नामक एक प्राचीन राजा थे। वे विष्णु के परम भक्त थे और चाहते थे कि विष्णु की एक मूर्ति उनके राज्य में स्थापित हो।

पुराण के अनुसार देव-शिल्पी विश्वकर्मा ने इस मंदिर की मूर्तियों को बनाने का कार्य लिया। शर्त यह थी कि कार्य पूरा होने तक कोई उन्हें न देखे। राजा से प्रतीक्षा नहीं हुई और उन्होंने द्वार खोल दिया। इसी कारण मूर्तियाँ अधूरी रह गईं — और यही जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विशिष्ट स्वरूप का कारण माना जाता रहा है।

8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने पुरी को चार धामों में से एक के रूप में स्थापित किया। उन्होंने यहाँ पूर्वाम्नाय गोवर्धन पीठ की भी स्थापना की।

स्कंद पुराण में पुरी क्षेत्र को पुरुषोत्तम क्षेत्र के नाम से वर्णित किया गया है।

जगन्नाथ पुरी चार धामों में पूर्व का धाम है। मंदिर के तीन प्रमुख देवता हैं — जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र, और बहन सुभद्रा। तीनों मूर्तियाँ काष्ठ (लकड़ी) की बनी हैं, और उनका विशिष्ट स्वरूप पुरी की एक पहचान बन गया है। मंदिर का स्थापत्य कलिंग शैली में है।

पुरी की एक प्राचीन परंपरा रथ यात्रा है। यह आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को होती आई है। इस दिन तीनों देवता विशाल लकड़ी के रथों पर सवार होकर निकलते हैं। यह यात्रा लगभग 3 किलोमीटर की है — मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

स्थापत्य
कलिंग शैली का पत्थर का मंदिर
देवता
जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा — तीनों काष्ठ मूर्तियाँ
सागर
बंगाल की खाड़ी के तट के पास
विशेष
रथ यात्रा की प्राचीन परंपरा
✈️
हवाई मार्ग
भुवनेश्वर हवाई अड्डा लगभग 60 किलोमीटर दूर है।
🚂
रेल मार्ग
पुरी रेलवे स्टेशन शहर में ही है। कोलकाता, चेन्नई और भुवनेश्वर से सीधी गाड़ियाँ चलती हैं।
🚗
सड़क मार्ग
भुवनेश्वर से लगभग 60 किलोमीटर। ओडिशा राज्य की बसें नियमित चलती हैं।
🌊
विशेष
मंदिर के पास ही पुरी का समुद्र तट है — पैदल जाया जा सकता है।
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