दक्षिण का धाम

रामेश्वरम

हिंद महासागर के तट पर बसा दक्षिण का धाम
📍 रामेश्वरम द्वीप, रामनाथपुरम ज़िला, तमिलनाडु
स्थान
रामेश्वरम द्वीप, तमिलनाडु
सागर
हिंद महासागर का तट
विशेष
ज्योतिर्लिंग और चार धाम — दोनों
📖 वाल्मीकि रामायण और स्कंद पुराण

वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई से पहले इसी स्थान पर रुककर भगवान शिव की पूजा की थी। राम शिव के परम भक्त थे और चाहते थे कि लंका जाने से पहले शिव का आशीर्वाद लें।

रामायण के युद्ध काण्ड में बताया गया है कि राम ने यहाँ एक शिवलिंग की स्थापना की। यह शिवलिंग बालू से बनाया गया था, क्योंकि उस समय कोई पत्थर का शिवलिंग पास उपलब्ध नहीं था।

इसी कारण भगवान शिव यहाँ रामेश्वर के नाम से विराजित हैं। रामेश्वर का अर्थ है — राम के ईश्वर, अर्थात राम के द्वारा पूजित शिव। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में भी ग्यारहवाँ माना जाता रहा है।

8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने रामेश्वरम को चार धामों में से एक के रूप में स्थापित किया। उन्होंने यहाँ दक्षिणाम्नाय शारदा पीठ की भी स्थापना की, जिसे श्रृंगेरी मठ कहा जाता है।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम ने स्वयं इसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की थी।

रामेश्वरम चार धामों में दक्षिण का धाम है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में अकेला ऐसा स्थान है जो चार धाम में भी गिना जाता है। यह तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी छोर पर स्थित है। यहाँ से लंका की दूरी कम है, और रामायण में इसी क्षेत्र से सेतु बनने का प्रसंग आता है।

रामनाथस्वामी मंदिर का स्थापत्य द्रविड़ शैली में है। मंदिर के गलियारे (कॉरिडोर) अपनी लंबाई के लिए जाने जाते हैं। मंदिर परिसर में 22 तीर्थ कुंड भी हैं, जिनमें भक्त परंपरागत रूप से स्नान करते आए हैं।

स्थान
रामेश्वरम द्वीप, तमिलनाडु
स्थापत्य
द्रविड़ शैली, लंबे गलियारों के लिए जाना जाता है
तीर्थ कुंड
मंदिर परिसर में 22 तीर्थ कुंड
विशेष
बारह ज्योतिर्लिंगों में अकेला, जो चार धाम में भी है
✈️
हवाई मार्ग
मदुरै हवाई अड्डा लगभग 170 किलोमीटर दूर है।
🚂
रेल मार्ग
रामेश्वरम रेलवे स्टेशन द्वीप पर ही है। चेन्नई और मदुरै से सीधी गाड़ियाँ चलती हैं।
🚗
सड़क मार्ग
मदुरै से लगभग 170 किलोमीटर। तमिलनाडु राज्य की बसें नियमित चलती हैं।
🌉
विशेष
मुख्य भूमि से रामेश्वरम द्वीप तक पंबन पुल — समुद्र पर बना एक सुंदर पुल।
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