पश्चिम का धाम

द्वारका

अरब सागर के तट पर बसी श्रीकृष्ण की प्राचीन नगरी
📍 द्वारका, देवभूमि द्वारका ज़िला, गुजरात
स्थान
द्वारका, गुजरात
सागर
अरब सागर का तट
नदी
गोमती नदी का संगम
📖 भागवत पुराण, हरिवंश पुराण और महाभारत

भागवत पुराण और हरिवंश पुराण के अनुसार द्वारका भगवान श्रीकृष्ण की राजधानी थी। मथुरा से आने के बाद कृष्ण ने अपने यदुवंशियों के साथ इस नगरी की स्थापना की।

महाभारत में भी द्वारका का विस्तृत उल्लेख मिलता है। इसे द्वारवती के नाम से भी पुकारा गया है। पुराण ग्रंथों में बताया गया है कि यह नगरी अपने समय में अत्यंत सुंदर और सुव्यवस्थित नगरी मानी जाती थी।

द्वारका का अर्थ है द्वारों वाली नगरी। पुराण परंपरा में यह कहा जाता रहा है कि इस नगर के अनेक द्वार थे। यह अरब सागर के तट पर बसी थी और गोमती नदी यहाँ समुद्र से मिलती थी।

8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने द्वारका को चार धामों में से एक के रूप में स्थापित किया। उन्होंने यहाँ पश्चिमाम्नाय शारदा पीठ की स्थापना की, जिसे द्वारका मठ कहा जाता है।

भागवत पुराण के अनुसार द्वारका भगवान श्रीकृष्ण की प्राचीन राजधानी थी।

द्वारका चार धामों में पश्चिम का धाम है। यह सप्त पुरियों में भी एक है। मुख्य मंदिर द्वारकाधीश के नाम से जाना जाता है — द्वारकाधीश का अर्थ है द्वारका के स्वामी, अर्थात कृष्ण। मंदिर का स्थापत्य चालुक्य शैली में है।

द्वारका के पास ही बेट द्वारका नामक एक छोटा द्वीप है, जो परंपरा में कृष्ण के निवास स्थल से जुड़ा रहा है। पास ही नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भी स्थित है। इसी कारण द्वारका यात्रा करने वाले भक्त इन दोनों स्थानों के दर्शन भी करते आए हैं।

स्थान
अरब सागर के तट पर
मुख्य मंदिर
द्वारकाधीश मंदिर — चालुक्य शैली
निकट
बेट द्वारका द्वीप और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
क्षेत्र
देवभूमि द्वारका ज़िला, गुजरात
✈️
हवाई मार्ग
जामनगर हवाई अड्डा लगभग 130 किलोमीटर दूर है।
🚂
रेल मार्ग
द्वारका रेलवे स्टेशन शहर में ही है। मुंबई और अहमदाबाद से सीधी गाड़ियाँ चलती हैं।
🚗
सड़क मार्ग
अहमदाबाद से लगभग 440 किलोमीटर। गुजरात राज्य की बसें नियमित चलती हैं।
विशेष
बेट द्वारका द्वीप तक नौका से जाया जाता रहा है — द्वारका से लगभग 30 किलोमीटर दूर।
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