उत्तर का धाम

बद्रीनाथ

हिमालय में बसा भगवान विष्णु का उत्तरी धाम
📍 बद्रीनाथ, चमोली ज़िला, उत्तराखंड
स्थान
चमोली ज़िला, उत्तराखंड
ऊँचाई
लगभग 3,300 मीटर
नदी
अलकनंदा नदी के तट पर
📖 स्कंद पुराण और भागवत पुराण

स्कंद पुराण के अनुसार बद्रीनाथ क्षेत्र भगवान विष्णु का प्राचीन निवास स्थान माना जाता रहा है। पुराण में बताया गया है कि विष्णु ने यहाँ कठोर तपस्या की थी।

कथा के अनुसार जब विष्णु तपस्या कर रहे थे, तब देवी लक्ष्मी ने बद्री वृक्ष (जुजुबे का पेड़) का रूप धारण कर उन्हें धूप और वर्षा से बचाया। इसी कारण इस स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा। बद्री का अर्थ है बद्री वृक्ष।

भागवत पुराण में भी बद्रीकाश्रम का उल्लेख मिलता है। यह नर-नारायण ऋषियों का तपस्थल भी माना जाता रहा है। पुराण ग्रंथों में इसे विष्णु का सबसे प्रिय निवास स्थान कहा गया है।

8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने इस स्थान को चार धामों में से एक के रूप में स्थापित किया। उन्होंने यहाँ एक मठ की भी स्थापना की, जिसे ज्योतिर्मठ कहा जाता है। यही ज्योतिर्मठ बद्रीनाथ की पीठ का केंद्र रहा है।

बद्री वृक्ष ने तपस्यारत विष्णु को धूप और वर्षा से बचाया — इसी कारण इस स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा।

बद्रीनाथ चार धामों में उत्तर का धाम है। यह छोटा चार धाम (उत्तराखंड) में भी शामिल है। हिमालय की गोद में लगभग 3,300 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर अलकनंदा नदी के तट पर है। मंदिर के पास ही नर और नारायण नामक दो पर्वत श्रृंखलाएँ हैं।

मंदिर वर्ष भर खुला नहीं रहता — सर्दियों में बर्फबारी के कारण यह बंद रहता है। परंपरा में मंदिर अप्रैल-मई से नवंबर तक खुलता है। शीतकाल में देवता को जोशीमठ ले जाया जाता है, जहाँ पूजा निरंतर चलती रहती है।

ऊँचाई
लगभग 3,300 मीटर समुद्र तल से
नदी
अलकनंदा नदी के तट पर
खुलने का समय
अप्रैल-मई से नवंबर तक
शीतकाल
देवता जोशीमठ ले जाए जाते हैं
✈️
हवाई मार्ग
जॉली ग्रांट (देहरादून) हवाई अड्डा लगभग 320 किलोमीटर दूर है।
🚂
रेल मार्ग
ऋषिकेश रेलवे स्टेशन सबसे पास है — लगभग 295 किलोमीटर दूर। हरिद्वार भी पास है।
🚌
सड़क मार्ग
ऋषिकेश और हरिद्वार से सीधी सड़क है। पहाड़ों का रास्ता लगभग 10-12 घंटे का है।
🚁
हेलीकॉप्टर सेवा
देहरादून और कुछ अन्य स्थानों से मौसम के अनुसार हेली सेवा उपलब्ध रही है।
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