राजस कर्ता में छह लक्षण होते हैं — राग, फल की इच्छा, लोभ, हिंसक प्रवृत्ति, अशुद्धता, और हर्ष-शोक में डूबा रहना। ऐसा व्यक्ति काम तो बहुत करता है, पर शांति नहीं पाता।
हर्ष-शोक का होना राजस कर्ता की पहचान है। जब फल मिलता है — खुश होता है। नहीं मिलता — दुखी होता है। यह उतार-चढ़ाव ही उसका बंधन है।