भगवान कहते हैं — ज्ञान, कर्म और कर्ता — तीनों को गुण-भेद से तीन-तीन प्रकार का बताया जाता है। यह गुण-विवेचन का विज्ञान है। इसे ध्यान से सुनो।
यह श्लोक एक लंबी शृंखला की शुरुआत है। जैसे ज्ञान तीन प्रकार का है — वैसे ही कर्म भी तीन, और कर्ता भी तीन। गुण-भेद से पूरी सृष्टि और सब मानवीय क्रियाएँ समझी जा सकती हैं।