चौथी और अंतिम सीढ़ी — यदि यह भी न हो सके तो क्या? कृष्ण फिर भी निराश नहीं करते। कहते हैं — मेरे योग का आश्रय लेकर, मन को वश में रखते हुए, अपने सब कर्मों के फल का त्याग कर दो।
फल-त्याग यानी — काम करो, पर उसके नतीजे की चिंता मत करो। किसान बीज बोता है — वर्षा होगी या नहीं, फसल होगी या नहीं, यह उसके हाथ में नहीं। पर वह बोता ज़रूर है। यही फल-त्याग है — कर्म पूरा, चिंता शून्य।