संजय धृतराष्ट्र को बताते हैं — हे राजन्, इस प्रकार कहकर, महायोगेश्वर हरि ने अर्जुन को अपना परम ऐश्वर्य-रूप दिखाया। यह वह क्षण था जब संसार के किसी मनुष्य ने पहली बार साक्षात् विश्वरूप देखा।
संजय यहाँ सूत्रधार की भूमिका में हैं। वे स्वयं भी इस अलौकिक दृश्य को देख रहे हैं और राजा धृतराष्ट्र को शब्दों में बता रहे हैं।