अर्जुन कहते हैं — हे जनार्दन, जब हम कुल के नाश से होने वाले दोष को स्पष्ट रूप से देख रहे हैं, तो हमें इस पाप से लौटना क्यों नहीं चाहिए?
यह पिछले श्लोक (1.38) का दूसरा भाग है। अर्जुन का तर्क है — कौरव लोभ के अंधे हैं, उन्हें दोष नहीं दिखता। लेकिन हम तो देख रहे हैं कि कुल का नाश होगा, मित्रों से द्रोह होगा। जब हमें यह सब दिखता है, तो हमें इस पाप से दूर होना ही चाहिए।
जैसे कोई व्यक्ति सड़क पर गड्ढा देख ले, तो उसे उस रास्ते से बचना चाहिए — भले ही दूसरे अंधेरे में गिर जाएँ। अर्जुन कह रहे हैं कि जानते हुए भी पाप करना और भी बड़ा अपराध होगा।