दूसरा अष्टविनायक

सिद्धिविनायक

जहाँ विष्णु ने सिद्धि पाई और दैत्यों को परास्त किया
📍 सिद्धटेक, अहमदनगर ज़िला, महाराष्ट्र
स्थान
सिद्धटेक, अहमदनगर ज़िला, महाराष्ट्र
नदी
भीमा नदी के किनारे
विशेष
मूर्ति की सूँड दाईं ओर — अष्टविनायक में यह विशेषता उल्लेखनीय मानी जाती रही है
📖 मुद्गल पुराण

मुद्गल पुराण में बताया गया है कि एक बार भगवान विष्णु गहरी निद्रा में थे। उस समय उनके कानों के मैल से मधु और कैटभ नाम के दो असुर उत्पन्न हुए। वे बड़े शक्तिशाली थे और उन्होंने सृष्टि को कष्ट देना शुरू कर दिया।

मुद्गल पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने विष्णु को जगाने का प्रयास किया, पर विष्णु नहीं जागे। तब यह समझा गया कि किसी दैवी शक्ति की सहायता चाहिए। विष्णु ने सिद्धटेक की पहाड़ी पर आकर गणेश जी की कठोर उपासना की।

मुद्गल पुराण में बताया गया है कि गणेश जी की कृपा से विष्णु को सिद्धि प्राप्त हुई। इसी सिद्धि के बल पर उन्होंने मधु-कैटभ का अंत कर सृष्टि को मुक्त किया। उस स्थान पर जहाँ विष्णु ने यह सिद्धि पाई, गणेश जी सिद्धिविनायक के रूप में विराजे।

ऐसी मान्यता रही है कि इस स्थान पर उपासना की परंपरा बहुत पुरानी है — यह विश्वास परंपरा से चला आ रहा है। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि यहाँ की मूर्ति की सूँड दाईं ओर झुकी है, जो अष्टविनायक की अन्य मूर्तियों से अलग मानी जाती रही है।

मुद्गल पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने यहाँ गणेश जी की उपासना की और सिद्धि प्राप्त की।

सिद्धटेक भीमा नदी के किनारे एक छोटी पहाड़ी पर बसा है। परंपरा में यह स्थान इसलिए विशेष माना जाता रहा है क्योंकि यहाँ की गणेश मूर्ति की सूँड दाईं ओर झुकी हुई है। अष्टविनायक के आठ मंदिरों में यह एकमात्र ऐसी मूर्ति मानी जाती रही है जिसकी सूँड दाईं ओर है।

भीमा नदी का प्रवाह मंदिर के पास से गुजरता है। भक्त नदी में स्नान करके मंदिर में दर्शन करते हैं। अष्टविनायक यात्रा में सिद्धटेक का दूसरा स्थान है। कार्तिक और माघ माह में यहाँ विशेष भीड़ होती है।

ज़िला
अहमदनगर, महाराष्ट्र
नदी
भीमा नदी के तट पर
यात्रा क्रम
अष्टविनायक में दूसरा स्थान
विशेष
परंपरा में यहाँ की मूर्ति की सूँड दाईं ओर झुकी मानी जाती है — अष्टविनायक में यह उल्लेखनीय विशेषता मानी जाती रही है
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा पुणे है, जो सिद्धटेक से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। अहमदनगर से भी यहाँ पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
दौंड रेलवे स्टेशन निकटतम है। पुणे-दौंड रेल मार्ग पर दौंड उतरकर वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग 17 किलोमीटर पर सिद्धटेक है।
🚗
सड़क मार्ग
पुणे से सिद्धटेक लगभग 100 किलोमीटर है। पुणे-सोलापुर मार्ग पर दौंड के पास से सिद्धटेक का रास्ता जाता है।
🗺️
विशेष
अष्टविनायक यात्रा के दौरान भक्त अक्सर मोरगाव के बाद सिद्धटेक आते हैं। दोनों के बीच की दूरी लगभग 75 किलोमीटर है।
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