पहला अष्टविनायक

मयूरेश्वर

अष्टविनायक यात्रा का प्रारंभ — जहाँ गणेश मोर पर विराजे
📍 मोरगाव, पुणे ज़िला, महाराष्ट्र
स्थान
मोरगाव, पुणे ज़िला, महाराष्ट्र
नदी
कर्हा नदी के किनारे
विशेष
अष्टविनायक यात्रा का प्रारंभ स्थल
📖 गणेश पुराण, उपासना खण्ड

गणेश पुराण के उपासना खण्ड के अनुसार, बहुत पुराने समय में सिंधु नाम का एक असुर था। वह बड़ा बलशाली था और उसने तीनों लोकों में उत्पात मचा रखा था। देवता उससे परेशान हो गए और उन्होंने भगवान गणेश की शरण ली।

गणेश पुराण में बताया गया है कि गणेश जी ने उस असुर का अंत करने के लिए मयूर — अर्थात मोर — पर सवार होकर युद्ध किया। सिंधु असुर का वध करने के बाद गणेश जी उसी स्थान पर विराजे। मोर पर विराजमान होने के कारण वे मयूरेश्वर कहलाए।

परंपरा में कहा गया है कि मोरगाव का नाम भी इसी मोर से आया है। मोर को संस्कृत में 'मयूर' कहते हैं, और 'गाव' मराठी में गाँव को कहते हैं। गणेश पुराण के अनुसार गणेश जी यहाँ स्वयंभू रूप में — अर्थात अपने आप प्रकट हुए — माने जाते रहे हैं।

ऐसी मान्यता रही है कि अष्टविनायक यात्रा की शुरुआत और समाप्ति दोनों मोरगाव से ही होती है। भक्त पहले यहाँ दर्शन करते हैं, फिर बाकी सात स्थानों की यात्रा करते हैं, और अंत में फिर यहीं लौटते हैं।

गणेश पुराण के अनुसार गणेश जी यहाँ मोर पर सवार होकर प्रकट हुए — इसीलिए वे मयूरेश्वर कहलाए।

मोरगाव का मयूरेश्वर मंदिर कर्हा नदी के किनारे बसा है। परंपरा में इसे अष्टविनायक यात्रा का केंद्र माना जाता रहा है। मंदिर की चहारदीवारी पर चार मीनारें हैं, और मुख्य द्वार के दोनों ओर बड़ी मूर्तियाँ हैं। यह स्थान महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में आता है।

भक्त दूर-दूर से यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। माघ चतुर्थी और भाद्रपद गणेश चतुर्थी के समय विशेष भीड़ देखी जाती है। मंदिर प्रांगण में एक विशाल नंदी की प्रतिमा भी मानी जाती रही है जो इस स्थल की पुरातनता की ओर संकेत करती है।

ज़िला
पुणे, महाराष्ट्र
नदी
कर्हा नदी के तट पर
यात्रा क्रम
अष्टविनायक में पहला और अंतिम — यात्रा यहीं से शुरू और समाप्त होती है
विशेष
मूर्ति की सूँड बाईं ओर झुकी हुई मानी जाती है, जो परंपरागत रूप से शुभ मानी जाती रही है
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा पुणे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो मोरगाव से लगभग 65 किलोमीटर दूर है।
🚂
रेल मार्ग
जेजुरी रेलवे स्टेशन निकटतम है। पुणे से जेजुरी तक ट्रेन से पहुँच सकते हैं, फिर वहाँ से मोरगाव सड़क मार्ग से लगभग 20 किलोमीटर है।
🚗
सड़क मार्ग
पुणे से मोरगाव लगभग 64 किलोमीटर है। पुणे-पंढरपुर मार्ग पर यात्रा करके यहाँ पहुँचा जा सकता है। महाराष्ट्र राज्य परिवहन की बसें भी उपलब्ध रहती हैं।
🗺️
विशेष
मोरगाव अष्टविनायक यात्रा का पहला पड़ाव है। अधिकांश भक्त पुणे से ही पूरी अष्टविनायक यात्रा की योजना बनाते हैं।
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