चौथा अष्टविनायक

वरदविनायक

वर देने वाले गणेश — जहाँ एक अखंड दीप सदा से जलता आया है
📍 महड, रायगड ज़िला, महाराष्ट्र
स्थान
महड, रायगड ज़िला, महाराष्ट्र
नदी
भीमा नदी के समीप
विशेष
परंपरा के अनुसार यहाँ एक दीपक बहुत लंबे समय से अखंड जलता आ रहा है
📖 मुद्गल पुराण

मुद्गल पुराण में बताया गया है कि राजा रुक्मांगद एक भक्त राजा थे। वे गणेश जी के परम उपासक थे। एक बार उनके जीवन में बड़ा संकट आया। उन्होंने इसी स्थान पर आकर गणेश जी की उपासना की।

मुद्गल पुराण के अनुसार गणेश जी ने राजा रुक्मांगद को दर्शन दिए और उनकी मनोकामना पूरी की। 'वरद' का अर्थ है वर देने वाले। इसीलिए यहाँ के गणेश 'वरदविनायक' कहलाए।

परंपरा में कहा जाता है कि यहाँ की मूर्ति भूमि से प्रकट हुई — अर्थात स्वयंभू है। ऐसी मान्यता रही है कि यह मूर्ति एक तालाब में मिली थी और उसे यहाँ विराजित किया गया। मुद्गल पुराण के अनुसार यह स्थान गणेश जी की स्वयं की इच्छा से पवित्र हुआ।

परंपरा में यह भी माना जाता रहा है कि इस मंदिर में एक दीपक बहुत लंबे समय से अखंड जल रहा है। भक्त इसे बड़ी श्रद्धा से देखते हैं। यह दीपक मंदिर की पुरातनता और उपासना की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है।

मुद्गल पुराण के अनुसार यहाँ वर देने वाले गणेश विराजे हैं — वरदविनायक।

महड का वरदविनायक मंदिर रायगड ज़िले में सह्याद्रि की तलहटी में बसा है। परंपरा में यह माना जाता रहा है कि यहाँ का गणेश स्वरूप विशेष रूप से कृपालु है। 'वरद' — अर्थात वर देने वाला — यह नाम ही इस स्थान की उपासना परंपरा की झलक देता है।

मंदिर के भीतर जलने वाले अखंड दीपक का विशेष महत्व माना जाता रहा है। भक्त यहाँ आकर शांति और आशीर्वाद के भाव से दर्शन करते हैं। माघ चतुर्थी और भाद्रपद में विशेष उत्सव होता है। अष्टविनायक यात्रा में महड चौथा पड़ाव है।

ज़िला
रायगड, महाराष्ट्र
स्थिति
खालापुर तहसील, सह्याद्रि की तलहटी में
यात्रा क्रम
अष्टविनायक में चौथा स्थान
विशेष
परंपरा के अनुसार मंदिर में एक अखंड दीपक बहुत लंबे समय से जलता आ रहा है
✈️
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा पुणे है, जो महड से लगभग 80 किलोमीटर दूर है। मुंबई हवाई अड्डे से भी यहाँ पहुँचा जा सकता है।
🚂
रेल मार्ग
खोपोली रेलवे स्टेशन निकटतम है। मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर खोपोली उतरकर वहाँ से सड़क मार्ग से महड पहुँचा जा सकता है।
🚗
सड़क मार्ग
पुणे से महड लगभग 80 किलोमीटर है। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से खोपोली होकर महड का रास्ता जाता है। स्थानीय बसें भी उपलब्ध रहती हैं।
🗺️
विशेष
पाली (बल्लाळेश्वर) और महड (वरदविनायक) दोनों रायगड ज़िले में हैं। अष्टविनायक यात्रा के दौरान भक्त अक्सर इन दोनों स्थानों को एक साथ देखते हैं।
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